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गर्मी से राहत दिलाने वाली बारिश अब सांस के मरीजों के लिए नई चुनौतियां लेकर आई है। मौसम में बढ़ती उमस और नमी अस्थमा व एलर्जी के मरीजों के लिए मुश्किलें बढ़ा रही है। पिछले कुछ दिनों में अस्पतालों में सांस लेने में तकलीफ, लगातार खांसी, गले में खराश और त्वचा पर रैशेज जैसी शिकायतें लेकर आने वाले मरीजों की संख्या में 20 से 25 प्रतिशत की वृद्धि हुई है।
SMS अस्पताल में बढ़ी मरीजों की भीड़
जयपुर के एसएमएस अस्पताल में एक महीने पहले जहां 40 से 50 ऐसे मामले सामने आते थे, वहीं अब यह संख्या 150 से अधिक हो गई है। जयपुरिया और गणगौरी अस्पताल में भी प्रतिदिन 100 से अधिक मरीज आ रहे हैं। इस बीच, एसएमएस के चेस्ट मेडिसिन विभाग और न्यूमोबायोसिस रोग संस्थान में अस्थमा के मरीजों की संख्या 150 से बढ़कर 300 प्रतिदिन हो गई है।
डॉक्टर्स क्या कहते हैं?
एसएमएस के स्किन स्पेशलिस्ट सीनियर प्रोफेसर डॉ. दीपक माथुर ने बताया कि पिछले कुछ दिनों में स्किन डिजीज के केस भी काफी बढ़े हैं और सावधानी रखना जरूरी है। पल्मोनोलॉजिस्ट डॉ. शीनू सिंह के अनुसार, बारिश में हवा में नमी बढ़ने से फफूंदी, फूलकण और परागकण तेजी से फैलते हैं। ये कण सांस के जरिए शरीर में प्रवेश कर एलर्जी और अस्थमा के लक्षणों को ट्रिगर करते हैं। मौसम में ठंडक और सीलन की मौजूदगी सांस की नलियों को संकुचित कर देती है, जिससे अस्थमा के मरीजों को सांस लेने में दिक्कत होती है।
ये लक्षण नजर आ रहे हैं:
सांस फूलना और सीने में जकड़न
लगातार छींक आना, नाक बहना
खांसी, गले में जलन
त्वचा पर खुजली या फंगल इन्फेक्शन
डॉक्टर्स की सलाह:
इनहेलर और दवाएं हमेशा साथ रखें।
गीले कपड़े या बिस्तर तुरंत बदलें।
कमरे में नमी न बनने दें, वेंटिलेशन रखें।
एयर प्यूरीफायर या डीह्यूमिडिफायर का उपयोग करें।
खानपान में हल्का व सुपाच्य भोजन लें।
इस मानसून में अपनी और अपने परिवार की सेहत का ध्यान रखें। यदि आप इनमें से कोई भी लक्षण महसूस करते हैं, तो तुरंत डॉक्टर से सलाह लें।
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