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01

Jul

26

20

गुर्जर आरक्षण पर फिर बनी समिति: क्या इस बार मिलेगी स्थायी समाधान की राह?

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गुर्जर आरक्षण पर फिर बनी समिति: क्या इस बार मिलेगी स्थायी समाधान की राह?

राजस्थान में गुर्जर आरक्षण का मुद्दा एक बार फिर सुर्खियों में है। राज्य सरकार ने गुर्जर समुदाय की मांगों पर विचार करने के लिए एक नई कैबिनेट उप-समिति का गठन किया है। यह पिछले दो दशकों में सातवीं बार है जब गुर्जर आरक्षण के लिए कोई समिति बनाई गई है, जो इस मुद्दे की गंभीरता और जटिलता को दर्शाती है।

समिति के सदस्य और उद्देश्य: इस नई समिति में कैबिनेट मंत्री जोगाराम, अविनाश गहलोत और बेड़म शामिल हैं। इस समिति का मुख्य उद्देश्य गुर्जर समुदाय की विभिन्न मांगों पर विचार करना और उनके समाधान के लिए सुझाव देना है। यह कदम गुर्जर नेताओं और प्रतिनिधियों के साथ हुए महत्वपूर्ण संवाद के बाद उठाया गया है।

इतिहास की पुनरावृति: बार-बार क्यों बनती हैं समितियां? गुर्जर आरक्षण की मांग को लेकर राजस्थान में कई आंदोलन हुए हैं। हर बार, सरकार ने समाधान का आश्वासन दिया है, जिसके परिणामस्वरूप समितियां बनी हैं। पिछली समितियां इस प्रकार थीं:

  • 2004-05: राजेंद्र राठौड़

  • 2007: राजेंद्र राठौड़, लक्ष्मीनारायण दवे और ज्ञानपाल

  • 2010: शांति धारीवाल, नृसिंहराम और डॉ. जितेंद्र सिंह

  • 2013: राजेंद्र राठौड़, अरुणा नरेसी और शंकर लाल

  • 2018: विश्वेंद्र सिंह, भंवरलाल मेघवाल और रघु शर्मा

  • 2020: रघु शर्मा, अशोक चांदना और भजनलाल जाटव

  • 2023: अब जोगाराम, अविनाश गहलोत और बेड़म।

मुख्य मांगें और वर्तमान स्थिति: गुर्जर समुदाय की मुख्य मांगों में एमबीसी (मोस्ट बैकवर्ड क्लासेस) में 5% आरक्षण की मांग शामिल है। 8 जून को भरतपुर में आयोजित महापंचायत में भी कई महत्वपूर्ण बिंदुओं पर सहमति बनी थी, जिसमें आरक्षण के अलावा अन्य विकास संबंधी मांगे भी थीं।

आगे क्या? गुर्जर आरक्षण का मुद्दा राजस्थान की राजनीति में हमेशा से संवेदनशील रहा है। हर बार समिति का गठन एक उम्मीद लेकर आता है कि इस बार स्थायी समाधान निकलेगा। सरकार के सामने चुनौती यह है कि वे किस तरह से सभी पक्षों को संतुष्ट करते हुए एक ऐसा हल निकालें जो न्यायिक और सामाजिक दोनों दृष्टियों से स्वीकार्य हो।

देखना यह होगा कि क्या यह सातवीं समिति गुर्जर समुदाय की दशकों पुरानी मांग को पूरा कर पाती है और राजस्थान में सामाजिक सौहार्द को बढ़ावा दे पाती है।

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